पारंपरिक झोपड़ीशिल्पग्राम

कुम्हार की झोपड़ी

शिल्पग्राम में गोवा परिसर में कुम्हार की 26‘‘ X 26’’ एक झोंपड़ी बनाई गई है। इस झोंपड़ी का नमूना गोवा में मृणकला के लिये प्रसिद्ध बिचोलियम अंचल से लिया गया है। गोवा के मिट्टी के कलात्मक संसार और इसके रचनाकार कुम्भकार का साक्षात्कार कराने के उद्देश्य से बनाई गई यह झोंपड़ी शिल्प बाजार का प्रमुख हिस्सा है। गोवा के कुम्भकारों द्वारा निर्मित सजावटी सामान, पशुपक्षियों के आकार, घरेलू उपयोग की चीजें पूजा सामग्री और अन्य भांति भांति के मृणकला के नमूने यहाँ देखे जा सकते हैं।

कुम्हार के दैनिक जीवन का वस्तुएं भी यहाँ प्रदर्शित की गई है उनमें से कुछ है: मिट्टी के बर्तन बनाने के सांचे, उपाडे बर्तन बनाने का चाॅक, मिट्टी के बुरबुले (मटके) पीतल का लमनडोवो, (दीया) मच्छी कोलो काटने के अडेओला चाकू कापड़ (साड़ी) मटके लाने ले जाने की झाली, जाबली मिट्टी का दिवजा (दीपक) गमले तुलसी वृन्दावन सहित तीन दर्जन से अधिक चीजें।
झोंपड़ी में समचैरस तीन खम्भों पर बना मेंगलोर टाइल्स से ढ़का खूबसूरत बरामदा साधारणतः कार्यशाला और कोठार हेतु और मेले तथा समारोहों में हाट बाजार के लिये भी प्रयुक्त होता है। बरामदे में एक और बना कलात्मक हाथी झोंपड़ी की सजीवता बढ़ाता है। बरामदे के सामने तुलसी स्थल है यह गोवा के जनजीवन का अंग माना जाता है । बरामदे के बाद एक कमरा जिसके दो हिस्से पहले गैलेरी और दूसरा कमरा जिसके एक हिस्से में कुम्हार का रसोई घर है । पूरा घर आंगन खुला-खुला, लिपा पुता और करीने से रखा सामान एवं अन्दर बाहर से सजा हुआ ।

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