ज़ोनल कल्चरल सेंटर के बारे में

परिचय
भारतीय सांस्कृतिक संपदा अनुश्रुत है। तथापि आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तन सांस्कृतिक परिदृश्य को निरन्तर बदलते रहते हैं। कला के स्वरूप और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ संक्रमण के ऐसे संदर्भों में लुप्त हो जाते हैं। अत: हमारे वंशागत मूल्यों और समृध्द सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक तंत्र की स्थापना अनिवार्य हो जाती है। इसी उद्देश्य के साथ क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की गई।

संरचना
23 मार्च 1985 को भारत के प्रधानमंत्री ने अपने उत्तरी क्षेत्र के हुसैनीवाला में क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की घोषणा की। सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की अवधारणा को विस्तार 7 वीं पंचवर्षीय योजना में प्राप्त हुआ। इन केन्द्रों की स्थापना क्षेत्रीयता एवं भाषायी सीमाओं को पाटने उसे बढ़ावा देने तथा सदस्य राज्यों की शैलियों व संस्कृतियों में अंर्तसम्बन्ध स्थापित कर भारत की संगठित संस्कृति के प्रोत्साहन के ध्येय से की गई।

इन केन्द्रों के मुख्यालय सामान्यतया राज्य की राजधानियों से दूर स्थित हैं। (कोलकाता में पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र को छोड़ कर) स्थान के चयन का मानदंड स्थान का परंपरागत सांस्कृतिक होना जनता की वहाँ तक पहँच होना है। संस्थागत रूप से प्रत्येक केन्द्र के पास एक परिसर होता है जिसमें प्रदर्शिनियों के लिए वीथियाँ, मंच कलाओं के लिए सुविधाएँ, प्रेक्षागृह, अभिलेखागार, पुस्तकालय इत्यादि शामिल होते हैं।

उद्देश्य
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापाना विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद भारत की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने और उसे संपोषित करने और देश में सांस्कृतिक सम्बध्दता की भावना का निर्माण करने के प्रमुख उद्देश्य से की गई है। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र ललित कलाओं, नृत्य, नाटक, संगीत, रंगमंच, शिल्प और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के सम्बंधित रूपों को प्रेरित, संपोषित और संवर्धित करते हैं। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र कलाकारों के लिए कला प्रदर्शन अवसरों में वृध्दि करने और उनके कला प्रकारों का प्रलेखन करने के लिए भी कार्य करते हैं। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की विशिष्ट विशेषता लोगों की सहभागिता पर बल देना है, जिसे विभिन्न कला रूपों के प्रतिपादकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर ग्रामीण कला रूपों का संवर्धन, लोक कला और जनजातीय कला पर बल दे कर और पारंपरिक ग्रामीण मेलों और उत्सवों को आयोजित करके सुनिश्चित किया जाता है।

संगठनात्मक ढाँचा
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत स्वायत्त निकायों के रूप में की गई। उनका संचालन एक शासी निकाय द्वारा किया जाता है जिसके अध्यक्ष उस राज्य के राज्यपाल होते हैं, जहां क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र का मुख्यालय स्थित है। शासी निकाय में भारत सरकार के नामिती जो संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव पद से नीचे के पद के नहीं होते, सहभागी राज्य सरकारों के नामिती और विभिन्न कला अनुशासनों में लब्धप्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं। शासी निकाय के अतिरिक्त क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र में, वर्ष के लिए कार्यक्रमों और व्यय प्रतिरूप का निरीक्षण करने और निर्णय लेने के लिए वित्त समिति और कार्यक्रम समितियाँ भी होती है। केन्द्रों के प्रतिदिन के मामलों को केन्द्र के निदेशक द्वारा देखा जाता है।