पारंपरिक झोपड़ीशिल्पग्राम

बन्नी झोपड़ी – कच्छ गुजरात

मेघवाल बन्नी कच्छ के मेघवाल समुदाय की झोपड़ी है। ऊँचे चबूतरे पर बनाई गई गोलाकार झोपड़ी जिस पर शंकु आकृति का छप्पर होता है। मेघवाल इसे बूँगो कहते हैं। इन झोपड़ियों की आकृति गोलाकार इसलिये रखी जाती है ताकि उस क्षेत्र में चलने वाली तेज और तुफानी हवा उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकें। छत का अंदरूनी हिस्सा बाँसवों से बुना होता है जो ककड़ी की छत को छके रहता है। जबकि बाहरी हिस्से पर स्थानीय घास की मोटी परत जमाई जाती है।

बूँगो में दो या तीन खिड़कियाँ और मात्र एक दरवाजा होता है। कमरे की छत को विभिन्न रंगों से सजाया जाता है साथ ही लकड़ी की नक्कारी और मिट्टी की लिपाई में बेलबूटे झोपड़ी को संवारा जाता है। झोंपड़ी में थाला पीतल की परात, पानी भरने की तामड़ी, पहनने के कपड़ों में घाघरा, कांचली, ओढ़नी, पेच के कार्य की गूदड़ी, भरत की कंजरी कपड़े की कोथली, सूरमादानी, पंखी, सफेद रबड़ की चूड़िया काँच छाछ बिलौने की मंदी मप मन, बिछाने की दड़की, पेच के काम की गूदड़ी वड़की, बहुआ आदि 6 दर्जन से भी ज्यादा वस्तुएं झोपड़ी में रखी हुई है।

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