पारंपरिक झोपड़ीशिल्पग्राम

लाम्बड़िया झोंपड़ी – गुजरात

उत्तरी गुजरात में खेड़ब्रम्ह के पास लाम्बडिया एक गांव है मृण कला के क्षेत्र में न केवल गुजरात में परंतु भारत भर में यह गांव पोशिना के घोड़ों के लिये सुप्रसिद्ध है। मिट्टी के आठ अलग-अलग हिस्सों को जोड कर एक जीव करने की इस अद्भुत कला को देखने अनके देशी विदेशी पर्यटक लाम्बडिया गांव जाते है। वहां कुम्हार युवक युवतियों के हाथ सदा मिट्टी से गीले रहते है। मिट्टी के घोड़ों के अलावा गुजराती केवल (खपरैल) मटके, आदि कई चीजें बनाते हैं। अपनी निर्मित चीजों के बदले गांव गंवई के आदिवासियों खेतिहरों से फसल के अवसर पर अनाज लेते है।

इस झोंपड़ी की दीवारें लिपाई करके बनाई गई है। जिनपर ढलवा छत है। घर के सामने एक पड़साल (बरमदा) है जहाँ एक सुन्दर हाथी बना हुआ है। पीछे की और एक आवासीय कमरा, झोपड़ी की बगल में चाक चलाने का स्थान है। तथा वहीं कुम्हार मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाते है। दूसरी और पके और अनपके बर्तनों को रखने का कमरा है। पिछवाड़े बर्तनों को पकाने का स्थान है। समूचा आंगन लिपाई किया हुआ है।

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