वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर के बारे में

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, भारत के पश्चिम राज्य राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमण दीव, दादरा नगर हवेली का प्रदर्शनकारी कलाओं, चाक्षुष कलाओं तथा वहां की लोक कला एवं आदिम कलाओं के सृजनात्मक विकास एवं सुविधाएं प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित सात सांस्कृतिक केन्द्रों में से एक केन्द्र है।

सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना के मूल में मुख्य ध्येय यह रहा है कि एक सृदृढ़ तंत्र के रूप में कलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में फैलना तथा विभिन्न राज्य एवं केन्द्रीय अकादमियों के रचनात्मक सहयोग से ग्रामीण, जिला, राज्य एवं अंर्तराज्यीय स्तर पर बिसरी कलाओं में समन्वय एवं अंतर्सम्बन्ध स्थापित कर कला एवं संस्कृति के विकास के समन्वित प्रयास करना। इनमें कलाकार, सृजनधर्मिता एवं विलुप्त कला एवं पुनरूत्थान का प्रमुख ध्येय निहित है।

राज्यपlल की कलम से.....

Shri Kalyan Singh

Hon’ble Governor Of Rajasthan

 

निदेशक की कलम से.....

भारत के ग्रामीण एवं आदिम क्षेत्रों में रहने वाले लाखों करोडों के मध्य कला के प्रोत्साहन, विकास के ध्येय से 1985-1987 में एक प्रसार तंत्र के रूप में क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की गई। इन केन्द्रों की परिकल्पना किसी बंद सभागार में सीमित लोगों के समक्ष कला प्रदर्षन कराने वाली संस्था के रूप में नही होकर अपितु सम्पूर्ण भारत के लोगों को प्रेक्षक व दर्षक मानते हुए एवं ग्राम्यांचल के हजारों लोक कलाकारों व षिल्पकारों को उनके क्षेत्र सीमाओं से बाहर कला प्रदर्षन का अवसर देने वाले केन्द्र के रूप में की गई है।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र कदाचित् ऐसा पहला केन्द्र है जिसने उदयपुर में षिल्प परिसर शिल्पग्राम की स्थापना की। जिसमें भारत के पश्चिमी राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा गोवा की पारंपरिक वास्तु कला, शिल्प परंपरा तथा लोक संस्कृति को दर्शाने वाली 31 पारंपरिक झोंपड़ियां बनाई गई हैं।
पश्चिमी क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला के साथ ही उदयपुर के शिल्पग्राम में हर वर्ष दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में शिल्पग्राम उत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। 10 दिन के इस उत्सव जिसमें जहां देष भर से 650 से ज्यादा लोक कलाकार तथा शिल्पकार भाग लेते हैं वही लाखों लोगों द्वारा उत्सव की सांस्कृतिक प्रवृत्तियों को निहारा जाता है।

 

पश्चिमक्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र का मुख्यालय 18 वीं शताब्दी में मेवाड़ राजपरिवार के प्रधानमंत्री द्वारा निर्मित ऐतिहासिक बागोर की हवेली में स्थित है। इस हवेली का अपना अनूठा वास्तु शिल्प है जिसमें कांच की कलात्मक कारीगरी तथा भित्ती चित्र हैं। 5 वर्ष के पुर्ननवीकरण कार्य के उपरान्त बागोर की हवेली में संग्रहालय सृजित कर राजसी जीवन शैली तथा सांस्कृतिक मान्यताओं को सावधानीपूर्वक संरक्षित कर इसके स्वरूप को निखारा गया।
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शुभ यात्रा